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लड़की ही तो थी ?

By   /  May 18, 2013  /  2 Comments

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girl

परसों की बात है
मेरे गोद में चहक रही थी
बार बार मेरे गालों को चूम रही थी
जता रही थी वो अपना प्यार
कभी मेरे चश्मे को नन्ही उंगलियों से पकडती
कभी चाभी के गुच्छे को मुह में दबाती
कभी गुब्बारे के इन्तेजार में घंटो धुप में खड़ी रहती
अचानक सब ख़तम होगया
मैं रो पड़ा
मानो सब लुट गया हो मेरा
अचानक कोई बोल पड़ा
क्या लड़की ही थी न
सायद लड़की होना ही अभिशाप बन गया
उसके जीवन के लिए….

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  • Published: 5 years ago on May 18, 2013
  • By:
  • Last Modified: May 19, 2013 @ 10:29 am
  • Filed Under: Thoughts

About the author

A Financial Consultant based in Delhi

  • umashankar pandey

    Touching piece on the girl child.

  • राकेश श्रीवास्तव

    मर्म-स्पर्शी !

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