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बर्बरता की ढाल ठाकरे

By   /  May 11, 2013  /  No Comments

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बाल ठाकरे! बाल ठाकरे!
कैसे फासिस्‍टी प्रभुओं की,
गला रहा है दाल ठाकरे!
अबे संभल जा, वो आ पहुंचा बाल ठाकरे !
सबने हां की, कौन ना करे !
छिप जा, मत तू उधर ताक रे!
शिव-सेना की वर्दी डाटे जमा रहा लय-ताल ठाकरे!
सभी डर गए, बजा रहा है गाल ठाकरे !
गूंज रही सह्यद्रि घाटियां,
मचा रहा भूचाल ठाकरे!
मन ही मन कहते राजा जी;
जिये भला सौ साल ठाकरे!
चुप है कवि,
डरता है शायद, खींच नहीं ले खाल ठाकरे !
कौन नहीं फंसता है, देखें,
बिछा चुका है जाल ठाकरे !
बाल ठाकरे! बाल ठाकरे! बाल ठाकरे!
बाल ठाकरे! बर्बरता की ढाल ठाकरे !
प्रजातंत्र के काल ठाकरे!
धन-पिशाच के इंगित पाकर ऊंचा करता भाल ठाकरे!
चला पूछने मुसोलिनी से अपने दिल का हाल ठाकरे !
बाल ठाकरे! बाल ठाकरे!
बाल ठाकरे! बाल ठाकरे!

———

Our culture says that we should not say ill about the dead, so I will refrain from making any comments. A verse by Poet Baba Nagarjun on Thakarey. If you replace Bal by Raj, you will be surprised to note that the poem is as relevant for the nephew as it was for the late Uncle.

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About the author

An IT Professional based in Pune, India. A Traveler, Photographer and Blogger. Self Proclaimed Middle of the Right.

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