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नंबर 473

By   /  May 23, 2013  /  Thoughts  /  No Comments

जिंदगी में कुछ चीजे ऐसे ही होती हैं जो बहूत कुछ सिखा जाती हैं ..ऐसा ही कुछ हुआ मेरे साथ. सुबह सुबह मैं बस स्टैंड चला गया सोचा आज सफ़र बस से कर लूँ ..तभी अचानक बिलकुल नयी चमकती हरी बस मानो लग रह था जैसे सड़क पर नरम हरी घास  की सेज बिछी हुई हो […]

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लड़की ही तो थी ?

By   /  May 18, 2013  /  Thoughts  /  2 Comments

girl

परसों की बात है मेरे गोद में चहक रही थी बार बार मेरे गालों को चूम रही थी जता रही थी वो अपना प्यार कभी मेरे चश्मे को नन्ही उंगलियों से पकडती कभी चाभी के गुच्छे को मुह में दबाती कभी गुब्बारे के इन्तेजार में घंटो धुप में खड़ी रहती अचानक सब ख़तम होगया मैं […]

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फुलवा नहीं रही ..

By   /  May 16, 2013  /  Musings, Thoughts  /  4 Comments

वो हर रोज आता कभी सड़क पर मेरे आँचल को खींचता कभी सरेआम दुपट्टे को ले भागता मैं रहती डरी सहमी अपने आप में घुट्टी सोचती क्या बोलूं किस्से बोलूं कोन सुने ये हाल मेरा चुप रही आगे बढती रही मानो जीवन एक चोराहे पर आ बट गयी हो पर जब देखती माँ बाबु को […]

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मंटो के लिए ..

By   /  May 12, 2013  /  Thoughts  /  5 Comments

Manto

मंटो …एक कश्मीरी, एक पाकिस्तानी या सिर्फ एक कलम, जिसने अपने समय से आगे जाकर वो लिख डाला जो आने वाली सदी के लिए बीते हुए पल का मात्र एक दस्तावेज ही नहीं सब कुछ हो ..”मंटो ” का मतलब होता क्या है ? इसका जिक्र मंटो ने अपने ही शब्दों में बड़ा खूब लिखा है। मंटो कहते हैं […]

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हिटलर की नानी की जय हो!

By   /  May 11, 2013  /  Thoughts  /  No Comments

Nagarjun_(1911-1998)

इसके लेखे संसद=फंसद सब फ़िजूल है इसके लेखे संविधान काग़ज़ी फूल है इसके लेखे सत्य-अंहिसा-क्षमा-शांति-करुणा-मानवता बूढ़ों की बकवास मात्र है इसके लेखे गांधी-नेहरू-तिलक आदि परिहास-पात्र हैं इसके लेखे दंडनीति ही परम सत्य है, ठोस हकीक़त इसके लेखे बन्दूकें ही चरम सत्य है, ठोस हकीक़त जय हो, जय हो, हिटलर की नानी की जय हो! जय […]

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